सकारात्मक सोच की शक्ति – The Power of Positive Thinking (Story in hindi)

सकारात्मक सोच के बिना किसी भी कार्य में success पाना  मुमकिन ही नहीं है, सकारात्मक सोच हर इसांन को रखनी चाहिए और हमेंशा positive ही सोचना चाहिए। इस लिए हम The Power of Positive Thinking (Story in hindi) लाये है, आपके लिए इसे पढ़कर आपकी सोच सकारात्मक हो जाएगी।

Power of Positive Thinking in hindi

विचार ही बीज है। 


Mahaan martial artist brus lee ने  कहा था  ''जैसा हम सोचते है वैसे ही हम बन जाते है'', तो खेल सब सोचने का है और अगर सोचना ही है तो positive ही ना सोचे।

नकारात्मक सोच की अपेक्षा सकारात्मक सोच से आप हर एक चीज बेहतर कर सकेंगे.

हमारे पास 2 बीज है एक nagetive सोच और दूसरी positive सोच अब हम जिस बीज को बोयेगे पेड़ उसीका होगा फल भी वैसे ही मिलेंगे। इस लिए हमे अपने दिमाग में सकारात्मक बीज बोना चाहिए, इसे हम बाइबिल की एक स्टोरी के साथ समझते है।

डेविड एंव गोलियथ की कहानी
David and Goliath Bible Story in Hindi


बाइबिल की एक कहानी काफी प्रसिद्ध है, इस कहानी से आप समझ ही जाओगे positive thinking क्यों जरुरी है।

एक गाँव में गोलियथ नामका एक राक्षस रहता था। उससे हर व्यक्ति डरता और परेशान था। एक दिन डेविड नामका एक भेड़ चराने वाला लड़का उसी गाँव में जहा लोग राक्षस से भयभीत थे। डेविड ने वहा के लोगो से कहा आप राक्षस से  लड़ते क्यों नहीं हो ?

तब लोगोने कहा - ''वो इतना बड़ा है की उसे मारा नहीं जा सकता''

डेविड ने कहा - ''आप सही कह रहे हो के राक्षस बहुत बड़ा है। लेकिन बात ये नहीं है की बड़ा होने की वजह से उसे मारा नहीं जा सकता, बल्कि हकीकत तो ये है की वह इतना बड़ा है इसलिए उस पर लगाया निशाना चूक ही नहीं सकता।''

फिर डेविड ने उस राक्षस को गुलेल से मार दिया। राक्षस वही था, लेकिन डेविल की सोच अलग थी।


यदि तुम आपदा के बारे में सोचते हैं , तो वो आ जाएगी.मौत के बारे में चिंता करते हैं तो तुम  अपने अंत की तरफ तेजी से बढ़ने लगते हैं.सकारात्मकता और  स्वेच्छाचारिता से सोचो , विश्वास और निष्ठा के साथ ,तब जीवन और सुरक्षित हो जायेगा, गतिविधियों से परिपूर्ण, उपलब्धियों और  अनुभव से भरा हुआ.

किस नज़र से आप इस दुनिया को देखते है। 


हमारे पुराणों में एक बात लिखी है की ''जैसी दृस्टि वैसी सृस्टि'' इस बात में ये कहा गया है की आप जिस नज़र से इस दुनिया को देखगे आप को ये दुनिया वैसी ही दिखेगी।

जैसे काले रंग का चश्मा पहनने हमे सब कुछ काला और लाल रंग का चश्मा पहनने से सब कुछ लाल दिखाई देता है वैसे ही नेगिटिव सोच से हमे अपने चारो और निराशा, दुःख और असंतोष ही दिखाई देगा और पॉजिटिव सोचे से हमें आशा, ख़ुशी और संतोष ही नज़र आएगा।

अब ये हम पर निर्भर करता है की हम नेगेटिव चश्मा पहने या पॉजिटिव चश्मा। अगर हम पॉजिटिव सोच रखेंगे तो हमारी जो प्रॉब्लम है वो सॉल्व हो जाएगी और नेगेटिव सोच से और बढ़ जाएगी आप खुश नहीं रह पाएंगे फिर।


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