MOTIVATIONAL STORY IN HINDI – LIFE CHANGING STORY

दोस्तों आपका MOTIVATIONAL STORY IN HINDI FOR EAGLE LIFE में आपका स्वागत है.

ये कहानी को पढ़ कर आपकी सारी परेशानिया ख़त्म हो जाएगी। LIFE CHANGING स्टोरी जो आपकी जिंदगी बदल दे।

MOTIVATIONAL STORY IN HINDI

motivational story in hindi for eagle life



दोस्तों हमारी जिंदगी में कई ऐसे मौके आते हैं जब हमें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 

कई लोग बत्तर से बत्तर परेशानी में सधर्ष करके आगे निकल जाते है और कई लोग हार मान लेते है

और कहते है "खुदा जो चाहता है वही होता है तो हम क्यो दर्द सहे" ऐसा कई लोग मान लेते है और कहते है।

एक बार चंद्रगुप्त ने आचार्य चाणक्य से कहा की "अगर नियति में लिखा है की में राजा बनुगा हम इतनी महेनत क्यू कर रहे है"

तब चाणक्य बोले ऐसा भी तो हो सकता है की तुम्हे महेनत करनी पड़ेगी काफी दुख-दर्द सहने पड़ेगे तभी तुम राजा बन पयोगे।

दोस्त याद रखना यह दुनिया उन्हीं को सलाम करती है जो अपने कलाम खुद ही लिखा करते हैं सिर्फ इंसान ही नहीं कुदरत में हर प्राणी के साथ ऐसा होता है।

हर बाज़ के जीवन में एक ऐसा समय आता है जहां उसकी जिंदगी में पहले दो रास्ते सरल पर तुरंत समाधान देने वाले होते हैं। वहीं तीसरा रास्ता कठिन और पीड़ा देने वाला होता है लेकिन बाद पीड़ा चुनता है और यहीं से शुरू होती है बाज़ संधर्ष की कहानी।

हर बाज़ 70 वर्ष तक जीता है लेकिन अपने जीवन के 40 वर्ष में आते आते उसे अपने जीवन का सबसे महत्वपूर्ण फैसला लेना होता है।

इस अवस्था में उसके शरीर के तीनो प्रमुख अंग बेअसर होने लगते है पहला उसके पंजे लम्बे और लचीले हो जाते है और शिकार पर पकड़ बनाने में कमजोर होने लगते है।

दूसरा उसकी चोंच आगे की और मुड़ जाती है और भोजन निगलने में मुश्किलें पैदा हो जाती है। तीसरा पंख भरी हो जाते है और सीने से चिपकने लगते है उस के कारण पुरे नहीं खुल पाते और उड़ान सिमित हो जाती है।

भोजन ढूंढने में भोजन पकड़ने और भोजन खाने में तीनों प्रक्रिया में मुश्किल होने लगती हैं अब उसके पास तीन ही रास्ते बचते हैं यह तो शरीर छोड़ दे या अपनी प्रवृत्ति छोड़कर गीड़ के जैसे छोड़े हुए भोजन पर निर्भर हो जाए या फिर स्वयं को स्थापित करें।

जहां पहले दो रास्ते अत्यंत सरल और तुरंत समाधान देने वाले होते हैं वहीं तीसरा रास्ता अत्यंत पीड़ादायक होता है और स्वयं को स्थापित करने के लिए शुरू करता है अपना संघर्ष वह ऊंचे पहाड़ पर जाकर एकांत में अपना घोंसला बनाता है।

अब बाज़ शुरू करता है पीड़ा भारी  ज़िद को, सबसे पहले वह अपनी सोच को पत्थर में मार मार के तोड़ देता है किसी पक्षी के लिए उसकी सोच तोड़ना सबसे पीड़ादायक होता है। फिर वह इंतजार करता है सोच के फिर आ जाने का।

उसके बाद वह अपने पंजे को उसी तरह तोड़ देता है पत्थर पे मार-मार कर और इंतजार करता है पंजों के दोबारा उगने का।

फिर पंजे और चोंच के बाद वह अपने भारी पंखों को एक-एक करके नोच कर निकाल देता है और प्रतीक्षा करता है पंखों के पुणे उगाने का।

150 दिन की पीड़ा और इंतजार के बाद बाज़ को फिर से वही ऊंची पर भव्य उड़ान मिलते हैं इस पुनर्स्थापना के बाद वह 30 साल और जीता है उसी ऊर्जा गरिमा और सम्मान के साथ।

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