Father Forgets in Hindi | शहद चाहिए तो छत्ते को लात मत मारो

क्या आप अपने बेटे से बहुत प्यार करते है ? लेकिन उसकी हरकतों की वजह से आप उसे दिन में 10 बार डाटते है फिर भी आपके बेटे में कोई सुधार (Change) आ रहा नहीं है और आप उसके भविष्य (Future) को लेकर चिंतित रहते है तो आज यह पोस्ट Father Forgets In Hindi आपकी सारी चिंताएं (Problems) दूर कर देगी।

आपको किसी भी व्यक्ति की आलोचना नहीं करनी चाहिए ? इससे आपके सम्बंद (relation) उस आदमी के साथ पहले जैसे नहीं रहते है, वह फिर आपका बेटा हो, आपकी गर्लफ्रेंड या वाइफ हो, आपका दोस्त या कहे तो कोई भी इन्शान हो आपको किसी की भी आलोचना, निंदा नहीं करनी चाहिए।

W. Livingston Larned Letter | Father Forgets in Hindi


ज्यादातर पिता अपने बेटे को डाटते रहते है की "तू किसी काम का नहीं है, तेरे जैसी औलाद मुझे क्यों दी भगवान ने , तू क्या मुझे कभी चैन से जीने देगा।" ऐसा नहीं है की पिता अपने बेटे को प्यार (Love) नहीं करता है, हर पिता अपने बेटे से बहुत ही प्यार (Love) करता है।

लेकिन क्या पिता के इस तरह से डाटते रहने से पिता और पुत्र के बिच दरार नहीं हो जाती है। क्या पुत्र ये नहीं मानने लग जाता है की "मेरे पिता मुझसे सिर्फ नफरत करते है और ये हमेशा ऐसा की करेंगे।"

क्या यही नहीं होता है, हर पिता के साथ में ?

इस पोस्ट में आप जानेगे की अपने बेटे के साथ आपको कैसा व्यवहार करना चाहिए। अधिकतर माँ-बाप सिर्फ अपने बच्चों की हमेशा आलोचना करते रहते हैं?जैसे ये उनका जन्मसिद्ध अधिकार हो। हमारे बच्चे को हम जैसा कहे वह वैसा की करे कोई रोक-टोक नहीं और कोई भी रोक लगा नहीं सकता है।

आप से मेरा केवल एक निवेदन है कि आप अपने बच्चों की आलोचना करने से पहले यह अमेरिकी पत्रकारिता के एक क्लासिक लेख “Father Forgets in Hindi” को एक बार पढ़ लें।

यह लेख पहली बार People's Home Journal के संपादकीय के रूप में छपा था और Reader's Digest में इसका संक्षिप्त रूपांतरण प्रकाशित किया हुआ था, यह उसका हिंदी में रूपांतरण है, जिसे आप पढने जा रहे है।Father Forgets In Hindi

Father Forgets in hindi

Father Forgets In Hindi (हर पिता यह याद रखे)


जरा सुनो बेटे ! मैं तुमसे कुछ बातें शेयर करना चाहता हूं। तुम तो गहरी नींद में सोए हुए हो। तुम्हारा प्यारा सा छोटा सा हाथ तुम्हारे कोमल गाल के नीचे दबा हुआ है। तुम्हारे पसीने में तर माथे पर गुगराले बाल बिखरे हुए हैं।

मैं अकेला हूं और चुपचाप तुम्हारे कमरे के अंदर आया हूं। अभी कुछ मिनिटों पहले मुझे बहुत पश्चाताप हुआ जब मैं पुस्तकालय में अखबार पढ़ रहा था। इसलिए तो मैं आधी रात के समय किसी अपराधी की तरह तुम्हारे बिस्तर के पास खड़ा हूं तुम्हारे पास हूं।

यह है वह बातें जिस के बारे में मैं सोच रहा था। बेटे, आज मैंने तुम पर बहुत क्रोध किया था। जब तुम विद्यालय जाने के लिए तैयार हो रहे थे, तो मैंने तुम्हें खूब डांट पिलाई थी... तुमने तोलिए की जगह पर्दे में हाथ पोछ लिए थे,  तुम्हारे गंदी जूते देखकर भी में  तुम पर क्रोधित हुआ था।

सारा फ़र्ज़ तुम्हारे द्वारा बिखेरी गई चीजों से भरा पड़ा था... इसके लिए भी तुम्हें बहुत मैंने कौसा था। जब तुम नाश्ता कर रहे थे तब भी मैंने तुम्हें भला बुरा कह दिया था। कारण, तुमने खाने की मेज (Table) पर खाना बिखेर दिया था और खाते समय तुम्हारा मुंह खुला था और चपड़ चपड़ आवाज भी आ रही थी।

तुम्हारी कुहनिया मेज पर थी और तुमने ब्रेड पर कुछ ज्यादा ही मक्खन लगा लिया था। केवल इतना ही नहीं, मेरे ऑफिस जाते वक्त भी जब तुम खेलने जा रहे थे और तुमने मुझे ' गुड बाय डैडी' बोला था तभी मैंने तुम्हें गुस्से मैं टोक दिया था - ' जरा अपना कॉलर तो ठीक कर लो' ऑफिस से लौटने पर भी मैंने देखा कि तुम अपने साथियों के साथ मिट्टी में खेल रहे थे।

तुम्हारी जुराबो में छेद हो गए थे और तुम्हारे कपड़े बहुत गंदे थे। मैं अपने क्रोध पर नियंत्रण न रख पाया और तुम्हारे साथियों के सामने ही तुम्हें अपमानित कर दिया। पता है जुराबे कितने महगी हो गई है, कपड़े कितने कीमती है। जब स्वयं अपनी कमाई से खरीदोगे, तब पता चलेगा। यही सच में मैंने कहा था और एक पिता अपने बच्चे का इससे अधिक दिल किस प्रकार दुखा सकता है।

तुम्हें तो याद ही होगा कि रात को जब मैं लाइब्रेरी में पढ़ रहा था और तुम मेरे कमरे में आए थे तो तुम कितने सहमे हुए और आतर्कित थे। वे तुम्हारी आंखों में झलक रही थी, वो तुम्हारे सीने की चोट थी। तब भी मैंने अखबार के ऊपर से देखते हुए पढ़ने में रुकावट डालने के लिए तुम्हें बुरी तरह से डाट दिया 'कभी चैन से जीने दिया करो।' और तुम दरवाजे पर ही स्टैचू बन गए थे।

 तुम कुछ भी बोले नहीं थे। मेरे पास भाग कर आए थे और मेरे गले में अपनी बाहें डाल दी थी और मुझे चूमा था और फिर ' good night dad' कहकर एकदम गायब हो गए थे, तुम्हारी नन्हीं बाहों की पकड़ ऐसी मजबूत थी कि वह एहसास करा रही थी कि इतनी अपेक्षा के बावजूद तुम्हारे मन मंदिर में खिला प्रेम रूपी पुष्प अभी तक मुरझाया नहीं है, और फिर तुम सीढ़ियों पर जोर-जोर से खटखट करके चल गए थे।

हा बेटे, इस घटना के कुछ समय बाद ही मेरे हाथों से अखबार छूट गया और मैं आत्मग्लानि में डूब गया था। आखिर मैं ऐसा क्यों होता जा रहा हूं। मेरी आदत डांटने फटकार की बढ़ती जा रही हैं। अपने बच्चे को  मैं यह कैसा बचपन दे रहा हूं। कहीं ऐसा तो नहीं है कि मैंने तुम्हें प्यार करना छोड़ दिया है, लेकिन मुझे तुमसे कुछ अधिक ही आशाएं हैं और मैं तुम्हारे बचपने को अपनी उम्र के तराजू पर तोलने लगा हूं।

तुम बहुत ही प्यारे, सच्चे और अच्छे बच्चे हो। तुम्हारा नन्हा सा मासूम सा ह्रदय तो चौड़ी पहाड़ियों के पीछे से ऊंची सुबह की भांति विशाल है। तुम्हारे अंदर तो बहुत बड़प्पन है, तभी तो इतनी डांट के बावजूद तुम मुझे 'गुड नाइट kiss' देने आ गए थे। तुमने कोई मैल नहीं है, यह रात बस इसलिए इतनी ख़ास है मेरे बेटे। मैं अंधेरे में तुम्हारे बिस्तर के सिरहाने घुटनों के बल बैठा हूं, लज्जित, अपमानित, तुमसे बहुत छोटा।

यह तो केवल एक दुर्बल पश्चाताप है। मुझे मालूम है कि अगर मैं अभी तुम्हें जगा कर यह बताऊंगा तो तुम कुछ भी नहीं समझोगे, लेकिन मैंने सोच लिया है, कल से मैं तुम्हें प्यारा पापा बनकर दिखाऊंगा। मैं तुम्हारे साथ खेलूंगा, तुम्हारी प्यारी प्यारी बातों को मैं पूरे दिल से सुन लूंगा, तुम्हारे साथ में सुख-दुख सब बांटूंगा।

अगली बार तुम्हे डाटने से पहले अपनी जीभ को अपने दातो के निचे दबा लुगा। यह मंत्र हमेशा याद रखुगा - "मेरा बेटा तो अभी बच्चा है छोटा-सा, प्यारा-सा, नन्हा-सा मासूम बच्चा।"

अब मुझे अपनी इस सोच पर बहुत दुःख होता है की में तुम्हे बहुत बड़ा मानने लगा था, लेकिन आज जब मेने देखा की तुम कैसे थके-थके मासूम से पलंग पर सो रहे हो एकदम निश्चितता के साथ, तो मेरे बेटे, मुझे यह अहसास हो गया है की तुम अभी छोटे-से बच्चे ही तो हो। कल तक तुम अपनी माँ की बाहों में झूलते थे, उसके कंधे पर सिर रखकर सो जाते थे। मेने तुमसे कुछ ज्यादा ही उम्मीद बांध ली थी, कुछ ज्यादा ही थी।

कभी भी बुराई मत करो, आलोचना मत करो, निंदा मत करो, शिकायत मत करो।

And OF Conclusion [Father Forgets In Hindi]



कोई माता-पिता अपने बच्चे का बुरा नहीं चाहते है। फिर भी हर माता-पिता अपने बच्चे को समझे बिना ही उससे ज्यादा अपेक्षा के चक्कर में अपने बच्चे की आलोचना ही करते रहते है।

मुझे यह लगता है की बेटे को आदर्श बनाने के चक्कर में माता-पिता हर बात पर उनकी तीखी आलोचना करते रहते हैं। हमें ऐसा नहीं करना चाइये, उनके साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए।

बच्चो की अच्छी परवरिश करने के लिए आपको W. Livingston Larned की दिल को छू लेने वाली विश्व प्रसिद्ध कविता Father Forgets बार-बार पढनी चाहिए।

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 निवेदन :  कृपया हमें Comment करके जरूर बताये की आपको Father Forgets in Hindi  यह पोस्ट आपको कैसी लगी। मुझे आशा है की इस पोस्ट को पढ़ कर आप कभी अपने बच्चे की आलोचना नहीं करेंगे और उन्हें समझने क्या प्रयास करेंगे।

मेरे एक और निवेदन है की, आप इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ Whatsapps और Facebook पर Share करे। ताकि वह भी अपने बच्चे और किसी भी आदमी की आलोचना ना करे कभी।

शहद खाने के लिए मधुमखी के छते पर लात मत मारे।

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2 टिप्पणियां

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